About Dev Kanya P. G. College

अपनी स्थापना के पश्चात् अल्प समय में हौं महाविद्यालय परिवार तथा देवली वासियों की अटूट निष्ठा के परिणास्वरुप यह छोटा सा महाविद्यालय एक विशाल महाविद्यालय के रुप में सामने आया है तथा राज्य के श्रेष्ठतम महाविद्यालय के रुप में प्रसिद्ध हुआ है। महाविद्यालय की 15 छात्राओ ने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय स्तर में प्रथम स्थान विभिन्न संकाय एवं कक्षाओ में प्राप्त किया है जिनका विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तावित दीक्षांत समारोह र्मे सम्मान किया जायेगा जो महाविद्यालय के लिए गौरव की बात है।

इस महाविद्यालय में धर्म एवं जाति, वर्ग एवं संस्कृति मे भेदभाव के बिना प्रत्येक सत्र में लगभग 2000 छात्राओ को शिक्षा प्रदान की जाती है जो कि क्षेत्र की छात्राओं के स्वर्णिम विकास एवं उनके उज्जवल भविष्य में प्रगति कीं प्रबल सम्भावनाओं के शुभ संकेत है ।

देवली कस्बे की अवस्थिति, पर्यावरण एवं इतिहास
1857 की क्रांति के क्रांतिकारियों की कर्मस्थली, स्वतंत्रता सेनानी एवं राजस्थान संघ के प्रधानमंत्री गोकुललाल असावा की जन्मस्थली, हाडौती एवं मेवाड की संघिस्थली देवली नगर राजस्थान का एक ऐतिहासिक नगर है । देवली टोंक जिले में 25o 46o उत्तरी अंक्षाश और 75o 23o पूर्वी देशान्तर में समुद्र तल से 1222 फुट की उंचाई पर स्थित टोंक जिले का तहसील मुख्यालय है । यह स्थान विश्व की प्राचीनतम पर्वतमाला अरावली की तलहटी में बसा जलवायु की दृष्टि से समशीतोष्ण है । यहाँ की औसत वर्षा 50 सेमी. है । यह राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 52 पर राजधानी जयपुर के दक्षिण-पश्चिम में 165 किमी. तथा जिला मुख्यालय टोंक से 68 किमी. की दूरी पर है ।

सन् 1855 के आस-पास इस नगर के निर्माण की योजना अजमेर, मेरवाडा तथा जयपुर व मेवाड राज्यों के त्रिसंगम स्थान पर स्थापित भूतपूर्व कोटा रेजीमेन्ट के कमाण्डर मेजर थॉमस ने तैयार की थी । प्रारम्भ में यह मिलिट्री रेजीमेन्ट की छावनी के रूप में बनाया गया था जो उस समय अजमेर-मेरवाडा तथा जयपुर एवं मेवाड राज्यों में सक्रिय उत्पातियों को रोकने के लिए स्थापित की गई थी।

देवली में हाडौती और टोंक पोलिटिकल एजेन्सी का मुख्यालय रहा है। सन् 1857 के पश्चात् जो मिलिट्री रेजीमेन्ट यहाँ स्थापित हुई उसका नाम ’’इनफेंन्ट्री ऑफ देवली इरेग्युलर’’ रखा गया । सन् 1903 में इसका नाम ’’40 सैकण्ड रेजीमेन्ट’’ कर दिया गया तथा प्रथम विश्व युद्ध के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। सन् 1922 में ’’मीना कोर’’ के रूप में इसकी फिर स्थापना हुई। सन् 1923 में छावनी को हटाकर यहाँ नगरपालिका स्थापित कर दी गई।

ब्रिटिश शासनकाल में देवली एक प्रसिद्ध स्थान रहा है। क्योंकि भारतीय राजनीतिक नजरबंदो को वहाँ रखा जाता था। द्वितीय विश्वयुद्ध में सन् 1942 से 1945 के दौरान इटली, जर्मनी, व जापान के युद्ध बन्दियों के लिएं यहाँ एक शिविर था। स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात् यहाँ पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से बहुत बडी संख्या में शरणार्थी आ गये थे। सन् 1962 में चीन से तथा 1965 में पाकिस्तानी व्यक्तियों को रखने का स्थान चुना गया। यहाँ प्रादेशिक सेना को बाद में होमगार्डस में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में यहाँ केन्द्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल का प्रशिक्षण संस्थान है।

देवली हिन्दू, जैन,सिक्ख, मुस्लिम धर्मो का केन्द्र है। यहाँ से 17 किमी. की दूरी पर गोकर्णेश्वर महादेव मन्दिर का प्राचीन प्रसिद्ध देवालय स्थित है। जहां राजस्थान का प्रसिद्ध बीसलपुर बांध राजस्थान के पूर्व में बहने वाली बनास नदी पर बना है, जो पर्यटन की दृष्टि से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।