प्रिय छात्राओं,
मै विद्या के इस मन्दिर देवकन्या कुटुम्ब की ओर से आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करती हूॅ । आज के इस प्रतियोगी युग में यह आवश्यक है कि हममें कुछ ऐसा हो जो भीड से हमें एक अलग पहचान दिलाये । आज का दौर साक्षर होने का नहीं शिक्षित होने की ओर उन्मुख होने का है । गांधी जी ने शिक्षा को परिभाषित करते हुए कहा है कि
’’ शिक्षा से मेरा अभिप्रायः बच्चे के शरीर, मन और आत्मा में विद्यमान सर्वोत्तम गुणों का सर्वांगीण विकास करना है । ’’
महाविद्यालय की बढती संख्या इस बात का प्रमाण है कि आप सभी का सहयोग हमें पूर्णतः प्राप्त है । आपका बढता विश्वास हमें आगे बढने के हमारे प्रयत्नों की ओर प्रेरित करता है और हमें इस कार्य हेतु बल प्रदान करता है । जिसके लिए हम आपके धन्यवाद के पात्र है । हमारा प्रयास सदैव यह रहा है कि हम महाविद्यालय में ऐसा वातावरण बनाये रखे जहाॅ हर छात्रा स्वयः का सर्वांगीण विकास कर सके । महाविद्यालय शिक्षा की हर उस प्रणाली को खोजने और अपनाने में तत्पर है जो बच्चों के अन्दर समझ को बढावा दे सके ताकि वह अधिकतम ज्ञानार्जन कर सकें ।
महाविद्यालय की पढाने की प्रक्रिया ग्रुप स्टडीज, मासिक आंकलन, मूल्यांकन, वाद-विवाद, प्रश्न-उत्तर, प्रयोग, वार्षिक जांच परीक्षा के द्वारा की जाती है । जिससे छात्राओं में आत्मविश्वास, प्रश्नों को समझने की क्षमता, सवालों के हल खोजने का उत्साह का विकास होता है । हमारा प्रयास यह है कि महिलाओं के इस दौर में हमारी छात्राएं अग्रणी होकर समाज का मार्गदर्शन करें । ज्ञान का वह स्तर वे यहाॅ प्राप्त करे जिससे उन्हें आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता ही नहीं अग्रिमता भी प्राप्त हो सके, यहीं हमारा एकमात्र लक्ष्य है ।
’’ तुम में है आइना हमारा
तो चलो हम अपने अक्स को कुछ और निखारते और सवांरते है ।
ताकि कल तुम्हारी कामयाबी पर,
हम सुने की कहने वाले हमारा (देवकन्या) नाम पुकारते है ।।
सुमन गुर्जर
