निदेशक की कलम से .................
प्रिय छात्राओं ,
नवीन सत्र 2017-18 में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन एवं मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएं ।
यह हम सबके लिए हर्ष का विषय है कि इस सत्र में महाविद्यालय अपनी स्थापना के 17 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है । विगत 17 वर्षो में महाविद्यालय ने अपनी प्रगति एवं विकास के अनेक सोपान तय किये है। इन वर्षाे मेें महाविद्यालय ने मूलभूत ढांचागत संरचना का विकास किया है । काॅलेज बस सुविधा के द्वारा दूर-दराज के क्षेत्रों में अपनी पहुॅच बनायी है और सबसे बढकर महाविद्यालय ने स्वयः को क्षैत्र में एक गुणवत्तापूर्ण महिला शिक्षा के एकमात्र ’’ब्रांड’’ के रूप में स्थापित किया है । यही कारण है कि सत्र 1999-2000 में 13 छात्राओं से आरम्भ हुआ यह महाविद्यालय वर्तमान में 2000 छात्राओं के एक वृहद् परिवार का आकार ग्रहण कर चुका है और इसमें निरन्तर वृद्धि हो रहीं है ।
इन उपलब्धियों के साथ हीं नूतन सत्र हमे आत्मावलोकन का एक अवसर प्रदान करता है कि किस प्रकार बदले हुए परिवेश मे भी अपने वजूद को ओर भी प्रासंगिक व समसामयिक बनाये रखा जा सकता है । निरन्तर बढती हुई छात्राओं की संख्या के साथ गुणात्मक शिक्षा की पंरम्परा को केसे अनवरत् रखा जा सकता है ? इन चुनौतियों के प्रति हम सचेत है यही कारण है कि हमने गत वर्षाे में बी.सी.ए. (कम्प्यूटर) व एम.एससी. (रसायन शास्त्र) जेसे रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का संचालन आरम्भ किया जो वर्तमान में भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहे है । भूमण्डलीकरण के वर्तमान आर्थिक युग मे वाणिज्य सबसे बडे कैरियर निर्माणक क्षैत्र के रूप में उभरा है । इसलिए इसे दृष्टिगत रखते हुए हमने वाणिज्य संकाय मे स्नातक पाठ्यक्रम बी.काॅम का संचालन प्रारम्भ कर दिया है । महिला सुरक्षा एवं सैन्य क्षैत्र मे महिलाओं के बढते अवसरो को देखते हुए हम नवीन सत्र में महाविद्यालय में एन.सी.सी. आरम्भ करने के लिए प्रयासरत् है । आधारभूत ढांचे के विकास मे महाविद्यालय का नवीन भवन निर्माण निर्मित भवन का विस्तार व नवीनीकरण, परिसर का सौन्दर्यीकरण व परिसर को सी.सी.टी.वी. निगरानी में लेकर आये है ।
सफलतापूर्वक 17 वर्ष पूर्ण कर लेना इस संस्था की अंतहीन विकास यात्रा का एक पडाव है । अतः इस अवसर पर हम देवली क्षेत्र के समस्त नागरिको, अभिभावको एवं प्यारी छात्राओं के प्रति आभार प्रकट करते है जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सहयोगी बने तथा आशा करते है कि भविष्य में भी आपका स्नेह एवं मार्गदर्शन निरन्तर मिलता रहेगा ।
मेरा दूरगामी स्वप्न यह है कि प्रत्येक घर में जब बेटी पैदा हो तो मां-बाप, दादा-दादी के दिल में प्रसन्नता हो, आंखों मे खुशी के आंसू हो और जबान पर यह शब्द हो, ’’ बेटी हुई है, बडी होने पर इसे देवकन्या भेजेंगे ।’’
शुभकामनाओं सहित ।
आपका अपना
(रमेश मुकुल)
